लॉकडाउन: लाचार पिता ने दिव्यांग बेटे को घर पहुँचाने के लिए चुराई साईकिल, छोड़ी भावुक चिट्ठी

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भरतपुर: श्रमिक इकबाल ने अपने दिव्यांग बेटे को भरतपुर से बरेली ले जाने के लिए एक साईकिल चुराई और वहां एक चिट्ठी छोड़ दी. इस चिट्ठी में उसने साईकिल मालिक से माफी मांगी है. कहा जाता है कि औलाद की खातिर पिता किसी भी कठिन से कठिन परिस्थिति को पार कर सकता है. ऐसे ही एक संतान के दुःख से दुखी बेवस लाचार पिता ने अपने दिव्यांग बेटे के लिए साईकिल चुराई और वहाँ पर साईकिल मालिक को एक चिठ्ठी लिखकर रख दी.

श्रमिक इक़बाल ने चट्ठी में लिखा- ‘मैं आपका कसूरवार हूँ माफ़ कर देना’ बरेली के इक़बाल ने भरतपुर के साहबसिंह को बहुत ही अजीब हालात में चिट्ठी लिखी उनकी यह चिठ्ठी इतिहास के पन्नों में दर्ज की जाएगी.

चिट्ठी लिखकर मांगी माफ़ी:

बरेली के इस मजदूर ने अपने दिव्यांग बेटे के लिए भरतपुर के रारह से एक साईकिल उठा ली साईकिल उठाते वक्त उसका जमीर गवाही नहीं दे रहा था इसके लिए उसने साईकिल मालिक को एक चिट्ठी लिखी उसमें माफ़ी मांगते हुए लिखा ‘मैं आपका कसूरवार हूँ, मैं एक मजदूर हूँ और मजबूर भी हूँ मैं आपकी साईकिल ले जा रहा हूँ मुझे माफ़ कर देना मुझे अपने दिव्यांग बेटे को अपने घर बरेली तक ले जाना है’.

(चित्र- प्रवासी मजदूर द्वारा लिखा गया क्षमा पत्र)
(चित्र- प्रवासी मजदूर द्वारा लिखा गया क्षमा पत्र)

भरतपुर जिले के रारह से चुराई साईकिल:

रारह उत्तर प्रदेश और राजस्थान की सीमा के पास का इलाका है यहाँ से प्रतिदिन सैकड़ों मजदूर यूपी की ओर आ रहे हैं इन्ही में शामिल इक़बाल ने रारह के निकट गाँव हरनावली निवासी साहबसिंह की साईकिल उठा ली. बुधवार रात से साहब सिंह की साईकिल गायब थी उन्होंने सुबह उठकर बहुत खोजा पर नहीं मिली, सुबह बरामदे में झाड़ू लगते वक्त एक कागज का टुकड़ा मिला.

चिठ्ठी को पड़कर साईकिल मालिक की ऑंखें हुईं नम:

इस कगज के टुकड़ा में मुहम्मद इकबाल ने अपना दर्द बयां किया था, इस चिट्ठी को पढ़कर साहबसिंह की आँखों में आंसू आ गए. उसने कहा कि उसे साईकिल चोरी होने पर बहुत दुःख हुआ व गुस्सा भी आया था लेकिन इक़बाल की चिट्ठी पढने के बाद मेरा गुस्सा संतोष में बदल गया. मेरे मन में साईकिल ले जाने वाले के प्रति मेरा कोई द्वेष नहीं है.

साहबसिंह न कहा मेरी साईकिल किसी के काम आ रही है यह मेरे लिए ख़ुशी की बात है और इकबाल ने भी मजबूरी में यह काम किया है. नहीं तो बरामदे में आकर वह और भी कुछ ले जा सकता था यहाँ पर और भी कीमती सामन रखा है.

बरेली का रहने वाला है इक़बाल:

इक़बाल कहाँ से आया कहाँ रहता है इसकी कोई जानकारी नहीं मिली है और उसे बरेली में कहाँ जाना है इसकी भी कोई जानकारी नहीं है इसका अंदाजा लगाया जा सकता है कि इक़बाल राजस्थान, गुजरात से लौट रहे हजारों मजदूरों की तरह ही था जो अपने गाँव, शहर, और घर पहुँचने की जद्दोजहद में चलते जा रहे हैं, इन मजदूरों में हजारों ऐसे हैं जिनके पास कोई साधन नहीं है.

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