लाउडस्पीकर से अजान नहीं है इस्लाम का हिस्सा: हाईकोर्ट

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प्रयागराज: माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने अपने फैसले में कहा है अजान इस्लाम का एक अहम हिस्सा है पर लाउडस्पीकर पर अजान इस्लाम का हिस्सा नहीं है. हाईकोर्ट ने अजान को फंडामेंटल राइट माना है लेकिन लाउडस्पीकर द्वारा अजान फंडामेंटल राइट नहीं है. पिछले कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिला के जिलाधिकारी ने अपने जिले में लगायी जाने वाली अजान पर रोक लगा दी थी इसके बाद यह मामला हाईकोर्ट तक पहुँच गया था. इस रोक के खिलाफ बसपा सांसद अफजाल अंसारी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी उसका फैसला हाईकोर्ट ने 15 मई को सुनाया है और उसमें कहा है कि अजान इस्लाम का अहम हिस्सा है लेकिन किसी इलेक्ट्रोनिक डिवाइस द्वारा अजान को फंडामेंटल राइट नहीं माना है.

सांसद अफजाल अंसारी की याचिका पर हाईकोर्ट ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय के हवाले से निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने कहा कि ( पैरा 40 और 41) सक्षम अधिकारी से बिना अनुमति के इलेक्ट्रोनिक डिवाइस का प्रयोग बिल्कुल नहीं कर सकते. इसके साथ ही इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गाजीपुर जिला के जिलाधिकारी के आदेश को रद्द करते हुए मस्जिदों में अजान की अनुमति दे दी है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि मस्जिदों में अजान Covid-19 की गाइडलाइन्स का उल्लंघन नहीं करती है. अदालत ने अपने आदेश में अजान को धार्मिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा हुआ बताया है लेकिन लाउडस्पीकर से अजान की अनुमति नहीं दी है.

माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने अपने आदेश में कहा है कि लाउडस्पीकर का प्रयोग उन्ही मस्जिदों में हो सकता है जिन्होंने इसकी लिखित अनुमति पहले ही ले ली है. जिन मस्जिदों के पास इसकी अनुमति नहीं है वह लाउडस्पीकर के उपयोग की परमीशन के लिए आवेदन कर सकते हैं. इसके साथ ही हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि जिन मस्जिदों के पास लाउडस्पीकर की अनुमति है उन मस्जिदों को ध्वनि प्रदूषण के नियमों का पालन करना पड़ेगा.

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